Sunday, August 21, 2011

छोटा-बड़ा !

होता है अक्सर
कभी कभी कुछ लोग
देखने में बहुत बड़े दिखते हैं
पर
जब हम उन्हें करीब से -
देखते हैं
समझते हैं
जानते हैं
पहचानते हैं
तब हमें यह एहसास हो पाता है
कि -
वे उतने बड़े नहीं हैं
जितने बड़े हमें दिखाई देते हैं !
क्यों, आखिर क्यों
ऐसा होता है !
क्यों हम धोखा खा जाते हैं
शायद, इसलिए, कि -
यह दुनिया चका-चौंध की नगरी है
जो
अपने आप को चका-चौंध में
खुद को हिट कर लेता है
वह
भले छोटा सही
पर
दिखाई देता है अक्सर हमें बड़ा !!

3 comments:

सतीश सक्सेना said...

जिसको न जानो वही अच्छा लगता है....
शुभ्कम्नाह्यें आपको !

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

आज कुशल कूटनीतिज्ञ योगेश्वर श्री किसन जी का जन्मदिवस जन्माष्टमी है, किसन जी ने धर्म का साथ देकर कौरवों के कुशासन का अंत किया था। इतिहास गवाह है कि जब-जब कुशासन के प्रजा त्राहि त्राहि करती है तब कोई एक नेतृत्व उभरता है और अत्याचार से मुक्ति दिलाता है। आज इतिहास अपने को फ़िर दोहरा रहा है। एक और किसन (बाबु राव हजारे) भ्रष्ट्राचार के खात्मे के लिए कौरवों के विरुद्ध उठ खड़ा हुआ है। आम आदमी लोकपाल को नहीं जानता पर, भ्रष्ट्राचार शब्द से अच्छी तरह परिचित है, उसे भ्रष्ट्राचार से मुक्ति चाहिए।

आपको जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई।

प्रवीण पाण्डेय said...

निकट जाकर ही व्यक्तित्व की पहचान होती है।