Sunday, February 20, 2011

किसी भी कमर पे हाथ, किसी का तय नहीं होता !!

कुछ देर को हम मान भी लेते, तुम झूठे हो
सच ! अब तक तुमने हमसे कुछ कहा नहीं !
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सुख, शान्ति, शान, आन, मान, पहचान
सच ! हिन्दी में मुझे दिखती है जन्नत !
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जब
चल पड़े हों कदम तेरे-मेरे, सुहानी राहों पर
कोई कितना भी कहे, मंजिलें तो छूकर रहेंगे !
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सच ! हमें यकीन था, कोई बेहद हसीं है
आज पर्दे की आड़ से, हमने उसे देखा है !
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जुर्म हो या हो, आत्महत्या ! तौबा तौबा
बेहतर है, हसीनाओं के सितम सह लेंगे !!
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कसम 'उदय' की हम तुम्हें चाहकर भी, कहने से डरते हैं
सच ! तुम पर नहीं, तुम्हारी कातिल अदाओं पे मरते हैं !
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नींद, चैन, दिल, जज्बात, ख्याल, जिस्म, रूह
सच ! इबादत के लिए सब की जरुरत थी मुझको !
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सच ! किसी दीवाने ने खूबसूरती समेटनी चाही है
मगर अफसोस, मेरी आँखों के पैमाने सबसे जुदा है !
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क्रिकेट का महाकुंभ सज-धज गया है
देखते हैं कौन किसके छक्के छुड़ाता है !
...
ग्लैमर की महफ़िल में, कोई किसी का नहीं होता
किसी भी कमर पे हाथ, किसी का तय नहीं होता !!

4 comments:

निर्मला कपिला said...

सच ! किसी दीवाने ने खूबसूरती समेटनी चाही है
मगर अफसोस, मेरी आँखों के पैमाने सबसे जुदा है !
वाह बहुत खूब। शुभकामनायें।

girish pankaj said...

shyam, in sheron ko ghazalo men dhaala ja sakata hai. shubhkamanaye.

अरूण साथी said...

सच ! किसी दीवाने ने खूबसूरती समेटनी चाही है
मगर अफसोस, मेरी आँखों के पैमाने सबसे जुदा है !
...


ग्लैमर की महफ़िल में, कोई किसी का नहीं होता
किसी भी कमर पे हाथ, किसी का तय नहीं होता !!




बहुत शानदार। भाई गारंटी तो नहीं कमर पे किसका हाथ होगा,,,,, सावधान उदय जी। और आपके आंखों का पैमाना जुदा है सुभानअल्लाह,,,, जाने तो जरा पैमाइश कैसे करते है...............

बहुत खुब।

arvind said...

कसम 'उदय' की हम तुम्हें चाहकर भी, कहने से डरते हैं
सच ! तुम पर नहीं, तुम्हारी कातिल अदाओं पे मरते हैं !
...romantik ho rahe hain...bahut khoob.