Tuesday, January 18, 2011

प्रेम से नहीं, दरिंदों को लातों से कुचला जाए !!

मुफलिसी, दुश्मनी, गम, अंधेरे, सताते रहते हैं
जब भी मिलते हैं, अकड़ के मिलते हैं, जैसे कर्जदार हूँ मैं !
...
बेवफाई के दौर में, वफादार कहाँ मिलते हैं 'उदय'
एक आस थी, टूट गई, जब आज वो बेवफा निकले !
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जुनून--मोहब्बत, जाने क्या गुल खिला दे
टूटे जब दिल, खुद को हिला दे, ज़माना हिला दे !
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कहो तो लिख दें बेवफाई पे 'उदय'
सुना है उन्हें वफ़ा रास आती नहीं है !
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अब तो हमारी दुकां मोबाइल पर ही चलती है 'उदय'
कोई टाईम टेबल नहीं है, जब जिसकी जैसी मर्जी !
...
अब किसी पे हमें ऐतबार रहा
सच ! तन्हाई में ही गुजर करते हैं !
...
आज के दौर में, तरफदार कहाँ मिलते हैं
वक्त मिलता है तो, खुद पे फना हो लेते हैं !
...
वादों
की बस्ती, आंसुओं के सैलाब में डूब गई
दिल, दिमाग, जहन से, तेरी हस्ती उजड़ गई !
...
घर में खोल ली है आफिस हमने
अब टेंशन घटाएं तो घटाएं कैसे !
...
उतार-चढ़ाव, आयेंगे, जाते जायेंगे 'उदय'
ये इरादे हैं मेरे, जो ठहरे हैं, ठहरेंगे !
...
चलो कोई तो खुश है, इल्जाम लगा कर 'उदय'
बदनाम करने के मंसूबों ने, सुर्ख़ियों में लाया है हमें !
...
उफ़ ! परवान चढ़ गए, कुर्वान हो लिए, फना हो गए
काश मौसम का मिजाज देख के, दीपक जलाए होते !
...
थक के बैठे हैं, वक्त कैसे गुजारा जाए
सच ! आओ किसी बच्चे को तराशा जाए !
...
कब तक हम होंगे खुश, देख दूजे की हस्ती-मस्ती
चलो कुछ करें, खुदी को मस्तमौला बनाया जाए !
...
मेरी हस्ती मिटा के, कोई खुश बहुत हुआ होगा
मरा नहीं हूँ, वतन परस्तों के जहन में ज़िंदा रहूँगा !
...
धूप, छाँव, खुशी, गम, तुम, हम
भुला बिसरी बातें, चलो हमदम बनें !
...
जज्बातों को कब तक समझाएं हम 'उदय'
प्रेम से नहीं, दरिंदों को लातों से कुचला जाए !
...
रहनुमाओं की आँखें देखो, अंदाज निराले हैं
बदलता दौर है, शैतानों को पहचानें कैसे !
...
क्या खूब बरसी है इनायत देखो
हाथ कहीं, आँख कहीं ठहरी है !
...
शब्द अनमोल हैं, भाव हम समझाएं कैसे
सीधी सी लकीर है, चलना सिखाएं कैसे !
...
मोड़, फिर मोड़, जिन्दगी गुजर जायेगी
सच ! चलो हमदम बनें, राहें सरल कर लें !
...
माँ, पैर, प्रेयसी, चुंबन, नया दौर है
उफ़ ! कुछ भूल गए, कुछ सीख लिया !
...
डाक्टर बीमार हुआ, क्या हुआ
भ्रष्ट कीड़े ने काटा है, टीका तलाशा जाए !

14 comments:

babanpandey said...

..saargarvit hai ..pratek antra..

सुशील बाकलीवाल said...

शब्द अनमोल हैं, भाव हम समझाएं कैसे
सीधी सी लकीर है, चलना सिखाएं कैसे !

शानदार प्रस्तुति.

संजय भास्कर said...

दरिंदों को लातों से कुचला जाए !!
..........शानदार प्रस्तुति

संजय भास्कर said...

उदय जी..
कैसे लिख जाते हो ऐसा सब..........

arvind said...

डाक्टर बीमार हुआ, क्या हुआ
भ्रष्ट कीड़े ने काटा है, टीका तलाशा जाए !...vahh... shandaar....

deepak saini said...

सारे शेर बेहतरीन है
ये कुछ खास लगा

डाक्टर बीमार हुआ, क्या हुआ
भ्रष्ट कीड़े ने काटा है, टीका तलाशा जाए

Harman said...

bouth he aache shabad ... good post

Music Bol
Lyrics Mantra

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

Uday ji,
Saari panktiyan gahan bhawon se avisinchit hain.
Aapki lekhani ki dhaar u hi bani rahe.
-Gyanchand Marmagya

Dinesh Mishra said...

Very nice........!!

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत भी बढ़िया शेर लगे खासकर घर को ऑफिस बना लिया टेंशन कैसे दूर करे ...बहुत सुन्दर लगा.... आभार

महेन्द्र मिश्र said...

घर में खोल ली है आफिस हमने
अब टेंशन घटाएं तो घटाएं कैसे
बहुत भी बढ़िया शेर लगे खासकर घर को ऑफिस बना लिया टेंशन कैसे दूर करे ...बहुत सुन्दर लगा.... आभार

Bhushan said...

डाक्टर बीमार हुआ, क्या हुआ
भ्रष्ट कीड़े ने काटा है, टीका तलाशा जाए!

यह अभिव्यक्ति सबसे विशिष्ट लगी. बहुत सुंदर.

राज भाटिय़ा said...

प्रेम से नहीं, दरिंदों को लातों से कुचला जाए !!
सहमत हे जी, हम भी साथ मे हे, इस काम मे

प्रवीण पाण्डेय said...

शठे शाठ्यम् समाचरेत।