Saturday, December 11, 2010

हम तो सिहर जाते हैं, कमबख्त तुम्हारी याद में !

दिलों के तार जब बजने लगें, मन के घरौंदे में
समझ जाना, यही अब हमारा आशियाना है !
...............................
गर 'खुदा' मिल भी जाए तो क्या फर्क
शैतान थे और हैं, शैतानियत छोड़ेंगे !
...............................
चलो अच्छा हुआ ठंड ने तुम्हें, मेरी याद तो दिलाई
हम तो सिहर जाते हैं, कमबख्त तुम्हारी याद में !
...............................
वाह वाह, क्या खूब यार बना रक्खे हैं
मरने की खबर सुनकर भी खामोश बैठे हैं !
..............................
उनका वादा था 'खुदा खैर' बन के आने का
हम बेख़ौफ़ बैठे थे, और वो खौफ बन के आये !

17 comments:

Kunwar Kusumesh said...

उनका वादा था 'खुदा खैर' बन के आने का
हम बेख़ौफ़ बैठे थे, और वो खौफ बन के आये

वाह वाह क्या बात है

JAGDISH BALI said...

Sundar aur ruhaani !

Patali-The-Village said...

बहत सुन्दर रचना| आभार|

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अन्तिम शेर बहुत शानदार है..

प्रवीण पाण्डेय said...

यादें होती हैं सिरहन पैदा करने के लिये ही।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ...

अरविन्द जांगिड said...

बेहतरीन शेर.......धन्यवाद.

अरविन्द जांगिड said...

चलो अच्छा हुआ ठण्ड ने तुम्हे मेरी याद तो दिलाई...... उदय जी क्या लिखा है!...साधुवाद.

राज भाटिय़ा said...

वाह जनाब जबाब नही बहुत खुब, ओर अंत मे तो हद ही कर दी,इस सुंदर गजल के लिये आप का धन्यवाद

वन्दना said...

बहुत सुन्दर गज़ल्।
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (13/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत सुन्दर शेर कहें हैं .......

देवेन्द्र पाण्डेय said...

दिलों के तार जब बजने लगें, मन के घरौंदे में
समझ जाना, यही अब हमारा आशियाना है !
...यह बहुत अच्छा लगा।

kshama said...

उनका वादा था 'खुदा खैर' बन के आने का
हम बेख़ौफ़ बैठे थे, और वो खौफ बन के आये !
Kya baat kahee hai!

मो सम कौन ? said...

गर 'खुदा' मिल भी जाए तो क्या फर्क
शैतान थे और हैं, शैतानियत न छोड़ेंगे !
...............................
ये हुई न उसूलों की बात :)

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

badhiya sher...

अनुपमा पाठक said...

सुन्दर!

सत्यम शिवम said...

बहुत ही खुबसुरत रचना.......मेरा ब्लाग"काव्य कल्पना"at http://satyamshivam95.blogspot.com/ साथ ही मेरी कविताएँ हर सोमवार और शुक्रवार "हिन्दी साहित्य मंच" पर प्रकाशित....आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे....धन्यवाद।