Sunday, December 19, 2010

बद हुए, बदनाम हुए, क्या हुआ, दौलत तो आने दो !

सच का आइना अब देखा नहीं जाता
खुदगर्ज चेहरा साफ़ नजर आने लगा है !
.....................
चलो एक और मंदिर-मस्जिद बना लें हम
सिवाय इसके, कुछ नेकी हम कर भी नहीं सकते !
.....................
है खबर मुझको, 'खुदा' नाराज बैठा है
क्या करें, बिना गुनाह के रहा नहीं जाता !
.....................
चलो एक और टुकड़ा बेच दें, हम शान से ईमान का
बद हुए, बदनाम हुए, क्या हुआ, दौलत तो आने दो !
.....................
ज़िंदा भूख से तड़फते-बिलखते हैं
कोई बात नहीं, चलो फूलों से मुर्दे सजा लें !

13 comments:

संजय भास्कर said...

सच का आइना अब देखा नहीं जाता
खुदगर्ज चेहरा अब नजर आने लगा है !
......आज के समय में सारी दुनिया ही खुदगर्ज़ है
खुदगर्जी कि सचाई बयाँ कि है आपने..

संजय भास्कर said...

उदय जी
हम तो आपकी भावनाओं को शत-शत नमन करते हैं.

अरविन्द जांगिड said...

"चलो एक और मंदिर-मस्जिद बना लें हम
सिवाय इसके, कुछ नेकी हम कर भी नहीं सकते"

शानदार शेर ! सुदर रचना.

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आपने सदा ही मेरा उत्साह बढ़ाया है...साधुवाद
आपका यहाँ भी स्वागत रहेगा
http://padhiye.blogspot.com/
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भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ज़िंदा भूख से तड़फते-बिलखते हैं
कोई बात नहीं, चलो फूलों से मुर्दे सजा लें !
bahut khoob..

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

उदय जी,
आदमी की फितरत पर अच्छा व्यंग्य किया है-
है खबर मुझको, 'खुदा' नाराज बैठा है
क्या करें, बिना गुनाह के रहा नहीं जाता !
शुभकामनाओं के साथ ,
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

JAGDISH BALI said...

बहुत ही दिलकश अंदाज़ में आपने इन्सानी फ़ितरत का चिट्ठा खोला है ! मेरे ब्लोग पर भि एक नज़र आएं !

प्रवीण पाण्डेय said...

सशक्त व्यंग।

mahendra verma said...

ज़िंदा भूख से तड़फते-बिलखते हैं
कोई बात नहीं, चलो फूलों से मुर्दे सजा लें !

वाह, बहुत खूब...
तल्ख़ सच्चाइयों को बख़ूबी बयां किया है आपने...

Harman said...

bahut khoob...

mere blog par bhi kabhi aaiye
Lyrics Mantra

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

har do lina lajawab.

निर्मला कपिला said...

है खबर मुझको, 'खुदा' नाराज बैठा है
क्या करें, बिना गुनाह के रहा नहीं जाता !
और आखिरी शेर बहुत ही अच्छा लगा। सच ब्यान किया है आपने।

राज भाटिय़ा said...

वाह जी बहुत खुब आज के हालात पर आप की यह कविता बिलकुल सटीक लगी . धन्यवाद

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

उदय भाई, आपके शेर समाज का आईना होते हैं। बधाई स्‍वीकारें।

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आपका सुनहरा भविष्‍यफल, सिर्फ आपके लिए।
खूबसूरत क्लियोपेट्रा के बारे में आप क्‍या जानते हैं?