Sunday, December 5, 2010

कडकडाती ठण्ड : प्रेम कहानी !

कल रात बेचैनी थी
नींद खुल गई
बिस्तर पर पड़े पड़े
करवट बदलता रहा
दस से पंद्रह मिनट
फिर उठकर बैठ गया !

थोड़ी देर बाद ही
खिड़की के पास
खडा हो ताजी हवा
के झोंके लेते लेते
नीचे सड़क के पार
नजर जा टिकी !

एक लड़की खडी थी
फ्राक पहने हुए
ठंड में सिकुड़ते हुए
जाने क्यूं
शायद इंतज़ार में
सवाल ! पर किसके !

अन्दर नजर दौड़ाई
घड़ी पर देखा
सुबह के साढ़े चार
बज रहे थे
फिर मेरी नजर
जा टिकी लड़की पर !

मैं कुछ सोचता
तब तक वहां एक
लड़का पहुंचा
दोनों कुछ पल बातें
गुपचुप करते रहे
जाने क्या !

लडके ने लड़की को
गुलाब फूल दिया
दोनों कुछ बुद-बुदाये
और चले गए, मैंने सोचा
कडकडाती ठण्ड ! क्या है
शायद ! प्रेम कहानी !!!

20 comments:

अरविन्द जांगिड said...

सुन्दर रचना, आभार

मनोज कुमार said...

ते कहानी तो हर मौसम की है, हां सर्दी की बात ही कुछ और है ....

ZEAL said...

प्रेम के असंख्य रूप !

monali said...

Jaise prem na dekhe jaat kujaat..waise hi prem na samjhe thand barsaat :)

वन्दना said...

प्रेम मे किसने देखा आंधी तूफ़ान फिर ठंड की क्या बिसात्।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

प्रेम को महसूस करना ही प्रेम करना है।
..सुंदर एहसास।

Kunwar Kusumesh said...

लडके ने लड़की को
गुलाब फूल दिया
दोनों कुछ बुद-बुदाये
और चले गए, मैंने सोचा
कडकडाती ठण्ड ! क्या है
शायद ! प्रेम कहानी

जाड़े में प्रेम,जाड़ा गायब

M VERMA said...

प्रेम तो शायद ठंड और गर्म से परे है
सुन्दर रचना

deepak saini said...

प्रेमियो को सर्दी, गर्मी और बरसात क्या चिंता
सुन्दर रचना

अरुण चन्द्र रॉय said...

प्रेम को महसूस करना ही प्रेम करना है।
..सुंदर एहसास।

महेन्द्र मिश्र said...

जनाब जाड़े की ठण्ड... और जोरों की लू ... न जाने कितने गुल खिलाते हैं ...ये गुल ही तो प्रेम हैं ...

डॉ टी एस दराल said...

सुबह के साढ़े चार बजे जागने वाले तो प्रेमी होते हैं । फिर आप ---?

प्रवीण पाण्डेय said...

हमने तो दो प्रेमियों को सुबह टहलते हुये भी देखा है।

ललित शर्मा said...


बेहतरीन लेखन

मीरा रानी दीवानी कहाने लगी

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

प्रेम की प्रेरणा यही है शायद।

संजय भास्कर said...

प्रेमियो को सर्दी,
..........सुन्दर रचना

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

प्रेम कहनी तो ठीक है पर आप क्यों करवट बदल रहे थे .....प्रव्हाह्मयी रचना .

Udan Tashtari said...

वाह! बेहतरीन!

दिगम्बर नासवा said...

ये कड़कती ठण्ड ही है .... लाजवाब ...

abhi said...

बेहतरीन है सर...मस्त..