Friday, November 26, 2010

साली की शादी ... दुख ... हौसला ... ... एक शेर !!!

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तुम्हारा जाना रश्म--रिवाज है, तो हंस के विदा करता हूँ
पर हर शाम बिना दस्तक के, मेरी यादों को सजाते रहना !

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14 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आप क्यों ऐसे मूड में हैं>..

'उदय' said...

@ भारतीय नागरिक - Indian Citizen
... bas yun hee ... ek mitra kaa dukh dekhaa nahee jaa rahaa ... !!!

निर्मला कपिला said...

हा हा हा बहुत खूब।

deepak saini said...

साली की शादी की शुभकामनाये

'उदय' said...

@deepak saini
deepak ji ... mujhe badhaai mat deejiye ... bas yun hi ... ek mitra kaa dukh dekhaa nahee jaa rahaa ... !!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:):) बहुत बढ़िया ..

Girish Billore 'mukul' said...

उदय भैया क्या हुआ
ऐसा है क्या वाह
नेटकास्टिंग:प्रयोग
लाईव-नेटकास्टिंग
Editorials

Arvind Mishra said...

ओह हो हो हो हो

शेखचिल्ली का बाप said...

lo ham bhi aaj aa hi gaye .
अपनी पोस्ट का उद्घाटन भी हुआ तो राम से हुआ , केवल राम से हुआ .
उत्तम , अति उत्तम . शुभ लक्षण , बड़ा अच्छा शकुन है .
और दूसरे भाई एक मुस्लिम हैं . यह भी अच्छा है . अपना ब्लॉग हिन्दू मुस्लिम सबके बीच लोकप्रिय होगा .

केवल राम said...

पर हर शाम बिना दस्तक के, मेरी यादों को सजाते रहना !
मीठा सच ....बहुत खूब
चलते -चलते पर आपका स्वागत है ....

मनोज कुमार said...

अहा! क्या बात है। हर शाम .... सजाते रहना। वाह।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

..हा..हा..हा..एक मित्र!

देवेन्द्र पाण्डेय said...

..हा..हा..हा..एक मित्र!

प्रवीण पाण्डेय said...

हादसा यह सबके साथ ही होता है।