Monday, September 27, 2010

खोटा सिक्का

सिक्का खोटा है
तो क्या हुआ
फेंक दोगे
तो क्या होगा
शायद कुछ नहीं !

पडा रहने दो जेब में
क्या फर्क पड़ता है
संभव है किसी दिन
काम जाए
क्या काम आयेगा !!
शायद कुछ नहीं !

पर, संभव है
किसी दिन
किसी दोराहे पर
वही खोटा सिक्का
हेड-टेल के
काम जाए

जीत कर
एक बाजी
नई मंजिल
नई दुनिया
का बादशाह
बना जाए

खोटा है
तो रहने दो
पर जेब में
पडा रहने दो
संभव है
किसी दिन
काम जाए !!!

17 comments:

kshama said...

Kya baat kahi hai...khota sikkabhi kuchh na kartab,kabhi na kabhi na kabhi dikhahi sakta hai!

Apanatva said...

ise kahte hai sakaratmak soch.......
aabhar !

Majaal said...

आदमी वैसे सोचता उल्टा है ,
खोटे सिक्के को चलता है पहले ,
और सही वाले को अपने पास रखता है ,
क्योकि सही तो कभी भी चल जाएगा ,
इसलिए पहले खोटे से छुटकारा पाया जाता है ,
और इस तरह , खोटा सिक्का , खरे सिक्के को ,
चलन से बाहर कर देता है ..
ये भी मजेदार रहे अगर आप जैसे सोचा जाए,
इस तरह, खरे सिक्के ,
फिर बाज़ार में आ जाए ...

Sunil Kumar said...

door ki soch ek din kam ayega achhi lagi rachna , badhai

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जी धन्यवाद

ललित शर्मा said...

खोटा सिक्का असली सिक्के को चलन से बाहर कर देता है।

प्रवीण पाण्डेय said...

खोटा सिक्का चलने का प्रयास करता है, फेंके जाने का नहीं।

arun c roy said...

बहुत सुंदर

ZEAL said...

खोटा है
तो रहने दो
पर जेब में
पडा रहने दो
संभव है
किसी दिन
काम आ जाए !!!

Beautiful imagination !

.

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया !!

डॉ टी एस दराल said...

बड़ी नेक सलाह दी है भाई । बहुत खूब ।

शरद कोकास said...

इस प्रतीक पर एक बहुत सुन्दर फिल्म बनी थी खोटे सिक्के वह याद आ गई । अच्छी रचना ।

Udan Tashtari said...

बहुत सटीक/// शरद भाई ने खोटे सिक्के की खूब याद की.

'अदा' said...

बहुत सटीक..
अच्छी रचना...!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब कहा है .... सच है कभी कभी खोटे सिक्के भी चल जाते हैं ....

सत्यप्रकाश पाण्डेय said...

बहुत सुन्दर.

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M VERMA said...

खोटा खोटा से कहे
खोट है हममे अपार
खोट बिना है कौन
खोटा जग संसार