Friday, September 24, 2010

शेर : साथ, पैक-पे-पैक, पत्थर

तेरे आने पर खुशी थी, जाने पर गम होगा
होगा जरुर कुछ, जब तक तेरा-मेरा साथ होगा

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बेटा सामने कमरे में बैठ, दोस्तों संग पैक-पे-पैक लड़ा रहा है
अन्दर कमरे में बाप, खाट पे पडा दबा के लिए तड़फडा रहा है

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वह रकीब बन, पत्थर हाथ में लेके मुझे ढूँढता रहा
सामने जब आया तो, पत्थर को घंटों चूमता रहा

8 comments:

संजय भास्कर said...

truly brilliant..
keep writing.....all the best

regards
sanjay bhaskar

मनोज कुमार said...

बच्चों की नलायकी पर कहा गया शे’र दमदार है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
स्वरोदय विज्ञान – 10 आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

राज भाटिय़ा said...

बेटा सामने कमरे में बैठ, दोस्तों संग पैक-पे-पैक लड़ा रहा है
अन्दर कमरे में बाप, खाट पे पडा दबा के लिए तड़फडा रहा है ।
यह तो आज का सच है जी, धन्यवाद

M VERMA said...

सभी शेर अच्छे लगे

Majaal said...

एक बात तो माननी पड़ेगी, कभी ग़ालिब भी आपके शेर पढ़ लें , तो एक बार तो वो भी हैरान रह जाएंगे की ये कौन सा अंदाज़ है ...

ZEAL said...

badhiya shero-shayri...aabhar.

डॉ टी एस दराल said...

वाह , क्या बात है । बढ़िया ।

प्रवीण पाण्डेय said...

हृदय छूती पंक्तियाँ।