Tuesday, August 3, 2010

ब्लागिंग एक नशा : मुक्ति का उपाय

यह कहना अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा की ब्लागिंग एक नशा है ! प्रमाणित करने के लिए भी ढेरों तर्क हैं ... सर्वप्रथम प्रमुख तौर पर ... आदमी सुबह बिस्तर से उठकर सबसे पहले कंप्यूटर "आन" करता है फिर बाथरूम जाता है ... दिन भर क्या करता होगा, नशे का आदि जो है .... रात को भी वही हाल बिस्तर पर जाने के पहले की क्रिया कंप्यूटर "आफ" करना होता है !

.... ये तो एक सिंपल उदाहरण है ... मैं यह नहीं कहता कि सभी लोग इस नशे के आदि हैं ... कुछ नहीं भी हैं ... और कुछ तो "चूरम-चूर" हो गए हैं ...

... खैर चिंतित होने की जरुरत नहीं है इस नशे से मुक्ति का उपाय भी है ... सर्वप्रथम सभी ब्लागर साथियों की राय भी जान लेना उचित समझ रहा हूं ... क्या सचमुच ब्लागिंग नशा है ? ... यदि है, तो मुक्ति के उपाय आपकी नजर में क्या हैं ??

विशेष टीप :- यह नशा मुझे भी तनिक-तनिक हो गया था !!!

13 comments:

मनोज कुमार said...

हां यह नशा है! पर इस पर कोई वैधानिक चेतावनी नहीं है। जितना जी में आए करो जी!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

कोई हर्ज़ नहीं...वो अभी बाथरूम तो जाता है न :)

Shah Nawaz said...

:-) ...................... कौन कमबख्त बाथरूम जाता है? पहले तो सारी हैडलाइन पढ़ी जाती हैं, उसके बाद पोस्ट..... फिर ताज़े लेखों में देखा जाता है की कौन से पढने हैं..... जो आ रहा है उसे दबा कर रखते हैं. जो ज्यादा ज़रूरी है उसे पहले करना ज़रूरी होता है ना. हाँ जब बर्दाश्त ना हो तो अलग बात है..... मज़बूरी में सारा नशा काफूर जो होता जाता है मियां.

;-)

arvind said...

हां यह नशा है.. lekin is nashe se mukti ki kyaa jarurat...?

राज भाटिय़ा said...

नही, मै नही मानता, यह नशा है, जब तक आप इस के गुलाम नही बनते तब तक, हां अगर आप इस के गुलाम बन जाये तो यह नशा बन जाता है, जिस का कोई इलाज नही, इस लिये कभी भी भुल से इस के गुलाम ना बने, एक दो तीन या महीना नही तो ना सही इस के लिये तडपे नही.....

honesty project democracy said...

उदय जी जिन्दगी ही एक नशा है बशर्ते असल नशे में जिया जाय ना की बोतल या पुरिया में मिलने वाली नकली नशा से उसी तरह ब्लोगिंग एक नशा है अब वह हम आप पर निर्भर है की वह नशा असली है या नकली जैसे जेहाद भी नकली होता है जो पाकिस्तानी आतंकवादियों का है और एक जेहाद और जूनून सत्य और न्याय के प्रति होता है जो शहीद भगत सिंह में था या खुदीराम बोश में ,यह भी एक असली नशा ही था ..|

डॉ टी एस दराल said...

नशा तो है ।
लेकिन अब उपाय भी आपको ही बताना पड़ेगा ।

sada said...

बिल्‍कुल सच कहा आपने, अब इस नशे का उपाय भी तो बताना होगा ।

Vivek VK Jain said...

bilkul sach.........thoda to hme b lg gya h.

Vivek VK Jain said...

bilkul sach.........thoda to hme b lg gya h.

संजय भास्कर said...

बिल्‍कुल सच कहा आपने,

सतीश सक्सेना said...

मुझे भी ऐसा ही लगता है उदय जी !!

शिवम् मिश्रा said...

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !