Monday, July 12, 2010

आक्टोपस बाबा की गुप्त रहस्यमयी शक्तियां !!!

इसकी आठ लचीली भुजाएँ होती है जिनके ऊपर भीतर की ओर अवृंत चूषक की दो पंक्तियाँ होती हैं, इन्हीं बाहुओं के सहारे यह आत्मरक्षा करता है या शिकार पकड़ता है।
आक्टोपस का एक समुद्री प्राणी है इस रात्रिचर जीव को डेविलफिश भी कहते हैं, आक्टोपस का कोमल, गोलाकार या अंडाकार शरीर दस सेंटीमीटर से लेकर करीब बीस फुट तक लंबा हो सकता है।
आक्टोपस दुनिया का सबसे बुद्धिमान अकशेरुकी जीव माना जाता है।

सभी आक्टोपस जहरीले होते हैं परन्तु सिर्फ नीले छ्ल्ले वाले अक्टोपस का विष ही मनुष्य के लिए घातक होता है, यहां तक कि इसे दुनिया के सबसे विषधर जीवों में से एक माना जाता है।
क्रमश: .... गुप्त शक्तियां अगले भाग में .... !!!

11 comments:

ललित शर्मा said...

बहुत बढिया जानकारी है।
लेकिन धरती पर रहने वाले आक्टोपस में इससे कई गुना ज्यादा प्राण घातक जहर है।

कभी उसके बारे में भी लिखें।

साधुवाद

डॉ टी एस दराल said...

अच्छी जानकारी । आजकल अष्टपाद हीरो बना हुआ है ।

kshama said...

Achhe jankaari mili...! Dr.Dalal ne hindi naam bhi bata diya!

संगीता पुरी said...

औक्‍टोपस के बारे में जानकारी देने का आभार !!

M VERMA said...

सुन्दर जानकारी
हिट है आक्टोपस अब तो

ब्लाग बाबू said...

अंकल आक्टोपस बाबा से पता करिये मै कब बडा ब्लागर बनूंगा हा हा हा ।

ब्लाग बाबू said...

अंकल आक्टोपस बाबा से पता करिये मै कब बडा ब्लागर बनूंगा हा हा हा ।

ब्लाग बाबू said...

अंकल आक्टोपस बाबा से पता करिये मै कब बडा ब्लागर बनूंगा हा हा हा ।

ब्लाग बाबू said...

अंकल आक्टोपस बाबा से पता करिये मै कब बडा ब्लागर बनूंगा हा हा हा ।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जानकारी जी, मुझे नीदर लेंड मै समुंदर के किनारे मिले थे इस से मिलते जुलते जीव, बहुत छॊटे लेकिन बहुत प्यारे, मैने ओर बच्चो ने हाथ मै ऊठा लिये थे, सो चार पांच घंटे हाथो मै जलन होती रही थी

सूर्यकान्त गुप्ता said...

इस अष्ट्पाद से कहीं अधिक, घातक है द्विपाद कब किसका क्या न बिगाड़ दे, रखें हमेशा याद। इस धरातल के मानव, समय बदल रहा है, प्रवृत्त्ति बदल रही है, बनते जा रहा है दानव। बाकी जानकारी के लिये शुक्रिया।