Tuesday, July 6, 2010

भारत बंद ...

मंहगाई बढी
आंदोलन .... भारत बंद
घोटाला हुआ
आंदोलन .... भारत बंद
भ्रष्टाचार हुआ
आंदोलन .... भारत बंद
असंतोष हुआ
आंदोलन .... भारत बंद

आंदोलन .... भारत बंद
अरे भाई, ये अपना लोकतंत्र है
यहां ये सब होते रहता है
आगे भी होते रहेगा

पर ये आंदोलन ... भारत बंद
चक्काजाम, पुतला दहन
तोड-फ़ोड, आगजनी
कितनी न्यायसंगत है
शून्य, नतीजे सिफ़र
पर क्षति अपार
ऎसा कब तक चलते
व दौडते रहेगा

कोई विकल्प निकालना
ही हितकर होगा
क्या कोई विकल्प है ?
हां बिल्कुल है
जिन महाशयों की बजह से
ये स्थिति - परिस्थिति
निर्मित होती है
क्यों न हम उन्हें मृत मानकर
"दो मिनट" का "मौन" धारण कर लें !

12 comments:

kshama said...

Aise samay koyi pista hai to wah aam janta! Band karate bhi inheen ke bhai bahan..apnehi daant apnehi hont...kisse kya kahen?

Jandunia said...

खूबसूरत पोस्ट

ब्लाग बाबू said...

सच लिख रहे हैं अंकल।

ब्लाग बाबू said...

सच लिख रहे हैं अंकल।

ब्लाग बाबू said...

सच लिख रहे हैं अंकल।

ब्लाग बाबू said...

सच लिख रहे हैं अंकल।

ब्लाग बाबू said...

सच लिख रहे हैं अंकल।

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

यथार्थ ........

धन्‍यवाद भाई.

arvind said...

खूबसूरत पोस्ट.यथार्थ .

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत सही ...वाह ... उम्दा अभिव्यक्ति..... जो जिम्मेदार हों क्यों न हम उन्हें जीते जी श्रद्धांजलि दें दें .... बहुत ही उम्दा सुझाव भी है .... ऐसे लोगो के लिए...

राज भाटिय़ा said...

अगर यह सारे कमीने मर जाये तो मै दो दिन का मोन धारण कर लुंगा, ताकि यह शांति से नरक मै जाये

मनोज कुमार said...

सच है। और कड़वा है।