Saturday, June 26, 2010

शेर

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नहीं है रंज, तेरी बेवफ़ाई का
रंज है तो, तेरी खामोशियां हैं।

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2 comments:

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

बहुत बढि़या शेर है उदय भाई. खामोशी को अब तोड़ना होगा.

हे बेवफा अब तो कमेंट चिपका दे. कुछ शब्‍द ना सही स्‍माईली तो लगा दे.

Suman said...

nice