Tuesday, March 16, 2010

छोटी सी ज्वाला

एक समय था जल रही थी
ऊंच-नीच की 'छोटी सी ज्वाला'
कुछ लोगों ने आकर उस पर
जात-पात का तेल छिडक डाला

भभक-भभक कर भभक उठी
वह 'छोटी सी ज्वाला'
फ़िर क्या था कुछ लोगों ने
उसको अपना हथियार बना डाला

न हो पाई मंद-मंद
वह 'छोटी सी ज्वाला'
अब गांव-गांव, शहर-शहर
हर दिल - हर आंगन में
दहक रही है 'छोटी सी ज्वाला' ।

4 comments:

संजय भास्कर said...

SHYAM JI JWAAB NAHI AAPKA...
BEHTREEN RACHNAA.....

राज भाटिय़ा said...

बिलकुल सही लिखा आप ने .धन्यवाद

मनोज कुमार said...

विचारोत्तेजक!

shama said...

न हो पाई मंद-मंद
वह 'छोटी सी ज्वाला'
अब गांव-गांव, शहर-शहर
हर दिल - हर आंगन में
दहक रही है 'छोटी सी ज्वाला' ।
sundar!