Monday, March 15, 2010

सत्य-अहिंसा ...

सत्य-अहिंसा के पथ पर
आगे बढने से डरता हूं
कठिन मार्ग है मंजिल तक
रुक जाने से डरता हूं

हिंसा रूपी इस मंजर में
कदम पटक कर चलता हूं
कदमों की आहट से
हिंसा को डराते चलता हूं

झूठों की इस बस्ती में
फ़ंस जाने से डरता हूं
'सत्य' न झूठा पड जाये
इसलिये "कलम" दिखाते चलता हूं

सत्य-अहिंसा के पथ पर
आगे बढने ......................।

3 comments:

डॉ टी एस दराल said...

'सत्य' न झूठा पड जाये
इसलिये "कलम" दिखाते चलता हूं

सही कदम।

राज भाटिय़ा said...

सही लिखा आप ने
धन्यवाद

संजय भास्कर said...

बहुत खूब, लाजबाब !