Monday, March 1, 2010

"ब्लागिंग" लोकतंत्र का "पांचवा स्तंभ"

"ब्लागिंग" का क्रेज दिन-व-दिन बढ रहा है धीरे-धीरे "ब्लागिंग" का एक प्रभावशाली स्थान बनते जा रहा है बुद्धिजीवी वर्ग के लोग इसे लोकतंत्र का "पांचवा स्तंभ" भी कहने लगे हैं, कुछेक लोगों में ऎसी भी "सरसराहट" है कि जो काम "प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रानिक मीडिया" नहीं कर रही है वह काम "बेधडक व निष्पक्षरूप" से "ब्लागिंग" में हो रहा है तात्पर्य ये है कि "ब्लाग" में बिना मिर्च-मसाला, बिना जोड-तोड, बिना लाग-लपेट के अभिव्यक्तियां की जा रहीं हैं जिनकी प्रसंशा सभी वर्ग के लोग कर रहे हैं।

"ब्लागिंग" पर एक क्षेत्र विशेष अथवा किसी व्यक्ति विशेष का अधिकार नहीं है वरन लेखन की सभी विधाओं का समान रूप से अधिकार है कहने का तात्पर्य ये है कि कवि, लेखक, कहानीकार, व्यंग्यकार, पत्रकार, आलोचक, समालोचक, इतिहासकार, ज्योतिषाकार, कार्टूनिस्ट इत्यादि सभी के लिये यह एक "खुला मंच" है इसके माध्यम से सभी अपनी-अपनी राय व हुनर को सफ़लतापूर्वक अभिव्यक्त कर रहे हैं ।

निसंदेह "ब्लागिंग" ने एक क्रांति का रूप ले लिया है जिसके माध्यम से ऎसी-ऎसी प्रतिभाएं उभर कर सामने आ रही हैं जिन्होंने लेखन के क्षेत्र में स्थापित "महानुभावों" को भी संशय में डाल दिया है, कुक्षेक "ब्लागर्स" की लेखनी तो इतनी प्रभावशाली है कि आने वाले समय में उन्हें राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रिय स्तर पर भी सराहा जायेगा और पुरुस्कारों से नवाजा जायेगा ।

अंत में, यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नही होगा कि "ब्लागिंग" न सिर्फ़ सामाजिक बदलाव व नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा वरन "प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया" के साथ मिल कर कदम-से-कदम मिलाकर एक नई राह दिखायेगा ।

14 comments:

डॉ टी एस दराल said...

श्याम जी , पुरूस्कार मिलें या न मिलें, लेकिन ब्लोगिंग ने एक आधार दिया है सबको आपने आप को अभिव्यक्त करने का । बेशक लेखन में आज नए लोग भी उभर कर सामने आ रहे हैं। यही उपलब्धि है ब्लोगिंग की।
अच्छा लेख।

Suman said...

nice

ali said...

श्याम भाई
ये सही है कि ब्लागिंग अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम के रूप में अवतरित हुई है किन्तु खतरा ये है कि पूर्व माध्यमों की तरह अकुशल हाथों में पड़कर बेलगाम घोड़ी न बन जाये !

jamos jhalla said...

उदय जी बिलकुल सही उवाचा है आपने|अपने विचारों को घर बैठे ही अभिव्यक्त करने को ब्लॉग एक सशक्त माध्यम बन गया है|प्रिंट के साथ साथ इलेक्ट्रोनिक मीडिया भी ब्लोग्स को अपने कार्यक्रमों में स्थान देने लग गए हैं|

राज भाटिय़ा said...

उदय जी बिलकुल सही कहा आप ने, आज समाचार पत्र अपनी गरिमा खोते जा रहे है, ओर ज्यादा तर तो इन नेताओ की चम्चा गिरी मै लगे है, ओर ब्लांग एक आजाद समाचार पत्र के रुप मे उभर कर सामने आ रहा है, एक खुले मंच की तरह से, सभी अपने अपने क्षेत्र की खबरे खुल कर लिख रहे है.
धन्यवाद

गिरीश पंकज said...

bloging me ek tarah ka loktantr hai. abhi isame kisi kism ka pratibandh nahi hai. isliye uyah paanchavaan stambh kahaajane lagaa hai. ekin dhyan rahe ki maryaada, garima, naitikta, shabdo ki shaleenata aadi bhi zarooree hai. ham bloging k zariye poori duniya me bharat ka, apne ilake ka aur ''khud apna bhi pratinidhitva'' karate haiisliye hamare vichaar gahrai liye ho. lampatataa, bachakaanapan aadi se door rah kar hi bloging kee pratishtaa bachaai jaa sakati hai. sanshep me hi sahi, achछ्a chintan dene ke liye badhaai.

शरद कोकास said...

ब्लॉगिंग पर आपके यह विचार अच्छे लगे ।

arvind said...

"प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रानिक मीडिया" नहीं कर रही है वह काम "बेधडक व निष्पक्षरूप" से "ब्लागिंग" में हो रहा है........बिलकुल सही कहा आप ने.

संजय भास्कर said...

उदय जी बिलकुल सही कहा आप ने,

makrand said...

exactly what we feel u written

वन्दना said...

bilkul sahi baat kahi hai.

देवेश प्रताप said...

बिलकुल सही कहा आपने ......आज अपनी बात खुल कर कहने का और लोंगो तक पहुचाने का सशक्त माध्यम बन चूका है .

वन्दना अवस्थी दुबे said...

सही है. अच्छी पोस्ट.

कमलेश वर्मा said...

gahri soch ..uttam lekh