Thursday, February 11, 2010

प्रार्थना / prayer

तेरा - मेरा
अंजाने में एक रिश्ता बनता है
हर पल मैं तुझको -
और तू मुझको भाते हैं

मैं चाहूं तू साथ मेरे हो
तू भी चाहे मेरे संग-संग रहना
फ़िर क्यूं
मुझसे तू - तुझसे मैं
तन्हा-तन्हा रहते हैं

मैं पुकार रहा हूं तुझको
तू आजा मेरे "सूने दिल" में
मेरे दिल में रहकर
तू अपना ले मुझको

फ़िर जब देखे ये जग सारा
तो मुझमें तुझको देखे
मुझमें "तुझको" देखे ।

8 comments:

संजय भास्कर said...

बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

रश्मि प्रभा... said...

prarthna ke shabd kuch alag se, bahut hi achhe

डॉ टी एस दराल said...

शिव तो रोम रोम में समाये रहते हैं , भक्तों के।
शिवरात्रि की शुभकामनायें।

अमिताभ श्रीवास्तव said...

shiv ratri par shiv ko samarpit rachna.../ shubhkamnaye.

Devendra said...

पनियाँ बरसे लगल झम झम बोल बम बम.
..आपकी कविता और शिव की आराधना में डूबे मन की अभिव्यक्ति.

Kajal Kumar said...

वाह भाई बहुत सुंदर लिखा है आपने.

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

aa said...

角色扮演|跳蛋|情趣跳蛋|煙火批發|煙火|情趣用品|SM|
按摩棒|電動按摩棒|飛機杯|自慰套|自慰套|情趣內衣|
live119|live119論壇|
潤滑液|內衣|性感內衣|自慰器|
充氣娃娃|AV|情趣|衣蝶|
G點|性感丁字褲|吊帶襪|丁字褲|無線跳蛋|性感睡衣|