Wednesday, September 16, 2009

शेर

न कर गुमान ख़ुद पे, वक्त ने दिया साथ तो निकल आए हो
छोडेगा जब साथ तो बिखर जाओगे
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तंग हालत में भी, शान न टूटने पाये
'उदय' कुछ राहें , ऐसी दिखाते रहना
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ये सच है, बहुत उलझा हुआ हूँ
पर सुकून है, तेरे साथ होने से
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हम कडकेन्गे जब आसमान में बिजली बनकर
अंधेरों में कहीं तो रौशनी होगी
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है मुमकिन करो कोशिश , तुम मुझको भूल जाने की
पर नामुमकिन ही लगता है, भुला पाना मुझे यारा

10 comments:

रश्मि प्रभा... said...

तंग हालत में भी, शान न टूटने पाये
'उदय' कुछ राहें , ऐसी दिखाते रहना
......bahut khoob

अर्चना तिवारी said...

bahutt khoob...behtareen ashaar

jamos jhalla said...

Rahen Dikhate Rehnaa HUZOOR

राज भाटिय़ा said...

ये सच है, बहुत उलझा हुआ हूँ
पर सुकून है, तेरे साथ होने से
बहुत खुब भाई, सभी शेर बहुत सुंदर लगे.
धन्यवाद

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी"में पिरो दिया है।
आप का स्वागत है...

vandana said...

behtreen sher hain ........ek se badhkar ek.

plz read my new blog---http://ekprayas.blogspot.com

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुंदर, भावपूर्ण और प्यारी रचना लिखा है आपने!ahut Barhia...aapka swagat hai...


http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Mumukshh Ki Rachanain said...

तंग हालत में भी, शान न टूटने पाये
'उदय' कुछ राहें , ऐसी दिखाते रहना

बहुत खूब, वाह, वाह

हार्दिक बधाई.
लम्बे समय बाद वापसी सकारात्मक ही रही. आशा है यूँ ही बराबर लिखते रहेंगें.

चन्द्र मोहन गुप्त
www.cmgupta.blogspot.com

Murari Pareek said...

न कर गुमान ख़ुद पे, वक्त ने दिया साथ तो निकल आए हो
छोडेगा जब साथ तो बिखर जाओगे
श्यामजी इतने उम्दा शेर कोनसे जंगल से लाते हो भाई !! इनकी दहाड़ तो वाकई काबिले तारीफ है पर तारीफ के लिए अल्फाज नहीं है !!

raj said...

ये सच है, बहुत उलझा हुआ हूँ
पर सुकून है, तेरे साथ होने से ..sath hona kitna sakoon deta hai....