Sunday, May 31, 2009

बोल-अनमोल

* 27 *
“मुझे उस पल का इंतजार है जब मैं स्वयं पर गर्व कर सकूं।”
* 26 *
“जब तक तुम्हे, किसी ने पागल नही समझा, तुम कैसे सोच सकते हो कि मंजिल की ओर सही रास्ते पर हो।”
* 25 *
“मुझे विरासत में क्या मिला, शायद कुछ नहीं, पर मैं अपने बच्चों को विरासत में कुछ देना चाहता हूँ, पर क्या?”

2 comments:

दिगम्बर नासवा said...

बस यही तो इक सवाल है................विरासत में क्या देना है.......पर क्या हम किसी भी लायक हैं, कुछ भी देने लायक हैं

संजय भास्कर said...

nice,,,,,,,,,