Monday, May 18, 2009

शेर - 41

हमारी दोस्ती, ‘खुदा’ बन जाए है इच्छा
अब खुशबू अमन की, ‘खुदा’ ही बाँट सकता है ।

3 comments:

विनय said...

जी बहुत अच्छा है

अल्पना वर्मा said...

achchey bhaav hain.

शरद कोकास said...

उदय भाई एक मुकम्मल गज़ल भी कह दो अब अच्छा लगेगा