Wednesday, February 25, 2009

शेर - 12

कौन जाने, कब तलक, वो भटकता ही फिरे
आओ उसे हम ही बता दें ‘रास्ता-ए-मंजिलें’ ।

10 comments:

परमजीत बाली said...

बढिया शेर है।

परमजीत बाली said...

श्याम जी,उदय की कलम से ब्लोग अच्छा बनाया है।बहुत बढ़िया व उम्दा रचनाएं हैं।लेकिन वहाँ पर कमैंट करने की सुविधा आपने नही दी।कृपया ध्यान दे।

cg4bhadas.com said...

छत्‍तीसगढ के विचार मंच में आपक स्‍वागत, है अगर आपके कोई भी खबर या जानकारी है जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सम्बन्ध छत्तीसगढ से है तो बस कह दीजिये हमें इंतजार है आपके सूचना या समाचारों का घन्यवाद

Harkirat Haqeer said...

Accha khyal hai....chlen...?

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर शेर है.
धन्यवाद

shama said...

Kaheen se link milaa...pehlee baar aayi aapke blogpe...behad sundar ashaar hain aapke...iske aage aur kya kahun?

दिगम्बर नासवा said...

खूबसूरत शेर है.........

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

निहायत खूबसूरत....बेहद उम्दा शेर

महावीर said...

शेर का हर लफ़्ज़ दिल को छूता हुआ लगा। ख़ूबसूरत शेर है।
महावीर शर्मा

Anonymous said...

good!!!!