Tuesday, January 20, 2009

शेर - 8

वतन की खस्ताहाली से मतलब नहीं उनको
वतन के शिल्पी होकर जो गददार बन बैठे।

6 comments:

BrijmohanShrivastava said...

समयानुकूल अति सुंदर शेर

रश्मि प्रभा said...

aaj ke parivesh ki jhalak.......sundar

Mumukshh Ki Rachanain said...

आपका शेर पढ़ा .......
वतन की खस्ताहाली से मतलब नहीं उनको
वतन के शिल्पी होकर जो गददार बन बैठे।
अच्छा लगा पर ,......
इसे तो हम यों कहना चाहेगें की

वतन की खस्ताहाली से मतलब नहीं उनको
गददार जब वतन के शिल्पी हो बन बैठे।

जय शिया राम जी की

चंद्र मोहन गुप्ता

ARVI'nd said...

sahmat to mai bhi hu aapse par ab wakt aa gaya hai jab in shilpio ko hame shilpkar bankar ek naye saanche me dhalnaa hoga

विक्रांत बेशर्मा said...

बहुत ही सच्चा शेर है !!!

रज़िया "राज़" said...

वतन की खस्ताहाली से मतलब नहीं उनको
वतन के शिल्पी होकर जो गददार बन बैठे।
sach kaha hai aapne.