Monday, December 15, 2008

शेर - ३

न छोडी कसर उन ने, कांटो को चुभाने में,
खड़े हैं अब अकेले ही, सँजोकर आरजू दिल में

3 comments:

BrijmohanShrivastava said...

उदय जी बहुत बढिया बात कही है पहले तो कांटे चुभाये अब पछता रहे होंगे

प्रकाश गोविन्द said...

बहुत खूब !
बढ़िया शेर है !

योगेन्द्र मौदगिल said...

Wah..
Wah..wa