Friday, May 11, 2018

भ्रम

राजधानी में
एक बड़े नेता और एक बड़े पत्रकार

दोनों
मुस्कुरा रहे थे
और
एक दूसरे की पीठ थप-थपा रहे थे

देख कर लगा
देश उन्नति में है, विकास की डोर सही हाथों में है

लेकिन, नहीं, शायद, सच्चाई कुछ और थी,

सामने पड़े एक अखबार के पन्ने पर -

तीन किसानों के आत्महत्या,
पांच लोगों के भूख से मरने,
एक मासूम बच्ची के साथ गैंग रेप,
एक दलित को सिर पर चप्पल रख कर घुमाने,

इत्यादि, खबरें ...... सुर्खियां बनीं थीं

उन्नति ... विकास .... मुस्कुराहट ... थप-थपाहट ....
उफ्फ ... शायद .. सब भ्रम है ??

~ श्याम कोरी 'उदय' 

Thursday, May 10, 2018

मोटी किताब

एक मोटी किताब
सुनते हैं, देश चलता है उससे

उसमें लिखा एक-एक शब्द पत्थर की लकीर है
लोगों से
हम तो ऐसा ही सुनते आए थे

पर, अब लगता है, सब झूठ है

आज
सफेद कुर्ते वाले, काले कोट वाले, अपराधी सोच वाले
उसमें ओवरराइटिंग कर दे रहे हैं

उनकी ओवरराइटिंग
कभी-कभी तो
हमें, पत्थर से भी ज्यादा मजबूत लगती है

शायद सब भ्रम था
मोटी किताब की जो कहानी हमने सुनी थी
झूठ थी ???

~ श्याम कोरी 'उदय'

Monday, May 7, 2018

The Ideology

"One Ideology, one Religion, one Nation
no
sorry friends
not possible to me,

Yes, I know, I am not a Butterfly
but
all Flowers are mine,

Yes, I am not a Bird
but
whole sky is mine,

Yes, I am not a God
but
whole world is mine."

~ uday 

Saturday, March 31, 2018

चीख !

चीख !
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किसी की चीख तुम्हें पुकार रही है
वहाँ .. उस खंडहर से ...

तुम जाओगे न ?

शायद तुम्हारी हिम्मत
किसी छेड़छाड़, बलात्कार, हत्या को रोक दे

हिम्मत करोगे न ?

या फिर, आस-पास से गुजर रहे
अन्य लोगों की तरह
तुम भी, चीख को अनसुना मान गुजर जाओगे ??

जोखिम तो है
चीख सुनने में, हिम्मत दिखाने में ..

पर तुम, कभी, अपने आप से झूठ नहीं बोल पाओगे
कि -
तुमने चीख सुनी ही नहीं ???

- श्याम कोरी 'उदय'

Friday, March 30, 2018

अचानकमार में टाइगर है ?

अचानकमार में टाइगर है ?
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कुछ लोग चाटुकारिता के मद में इतने मदमस्त हैं कि गौर (बाइसन) व चीतल (डिअर) की फोटो सोशल मीडिया में लगा-लगा कर तथा हर 10-12 घंटे में चर्चा कर इस महिमा मंडन में लगे हुए हैं कि अचानकमार टाइगर रिजर्व एक स्वर्ग है।

अगर वे ... टाइगर की फ़ोटो लगाते व चर्चा करते तो निसंदेह मुझे उनकी पीठ थप-थपाने से परहेज नहीं होता, लेकिन वे बाइसन व डिअर की बार-बार चर्चा कर चाटुकारिता के नए अध्याय लिखने का जो प्रयास कर रहे हैं निंदनीय हैं ।

आज ... आवश्यकता है अचानकमार में टाइगर को केंद्र-बिंदु मानने की, टाइगर की उपलब्धता को शोध का विषय  मानने की, यदि कुछेक वर्ष ऐसा ही चलता रहा तो टाइगर की चाह में जो पर्यटक भूले-भटके आ रहे हैं उनका आना भी बंद हो जाएगा ।

जहाँ तक मेरा मानना है ... शासकीय अमले को चाहिए कि अचानकमार में टाइगर के लिए ऐसा माहौल निर्मित किया जाए कि जो टाइगर अब तक सिर्फ और सिर्फ शासकीय अमले के खूफिया कैमरों में नजर आता है वह आमजन (पर्यटकों) को भी नजर आ सके ।

साथ ही साथ ... वाइल्डलाइफ लवर्स, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स व शासकीय अमले को मेरी सलाह है कि वे आपस में कुछ इस तरह का ताल-मेल बना कर चलें जो अचानकमार टाइगर रिजर्व के नाम के अनुरूप हो व हित में हो ।

- श्याम कोरी 'उदय'