Friday, October 23, 2009

शेर

कभी इस पार, कभी उस पार
बता आख़िर ... ... ...
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कहीं भी आग दिखती नहीं यारा
न जाने ये धुंआ उट्ठा कहाँ से है
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किसे अपना कहें , किसे बेगाना
सफर में तो सभी, हमसफ़र हैं 'उदय'
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तेरा पतलून की जेबों को खामों-खां टटोलना अच्छा लगा
पैसे क्यों दे दिए 'जनाब', बाद में ये पूंछ लेना भी अच्छा लगा
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मोहब्बत में जीने-मरने की क़समें खाते हैं सभी
पर दस्तूर है ऐसा , कोई जी नहीं - तो कोई मर नहीं पाता

Friday, October 16, 2009

दीपावली अभिनन्दन ...

"आओ मिल कर फूल खिलाएं, रंग सजाएं आँगन में
दीवाली के पावन में , एक दीप जलाएं आंगन में "
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"सूना न हो अब कोई दिल, और न हो अब खामोशी
'उदय' तू भी बन जा 'दीप' मेरे संग , जग में कर दें रौशनी "

Wednesday, September 16, 2009

शेर

न कर गुमान ख़ुद पे, वक्त ने दिया साथ तो निकल आए हो
छोडेगा जब साथ तो बिखर जाओगे
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तंग हालत में भी, शान न टूटने पाये
'उदय' कुछ राहें , ऐसी दिखाते रहना
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ये सच है, बहुत उलझा हुआ हूँ
पर सुकून है, तेरे साथ होने से
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हम कडकेन्गे जब आसमान में बिजली बनकर
अंधेरों में कहीं तो रौशनी होगी
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है मुमकिन करो कोशिश , तुम मुझको भूल जाने की
पर नामुमकिन ही लगता है, भुला पाना मुझे यारा

Tuesday, September 1, 2009

शेर

अंधेरे उजालों से कहीं बेहतर हैं

वहाँ हैं तो सभी, पर दिखते नहीं हैं

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भीड़ में चैन नहीं मिलता

सुकून की चाह में तनहा हूँ

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क्यों खो रहे हो रातों का सुकून

हाय-तौबा जिंदगी भर अच्छी नहीं यारा

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'उदय' कहता है , जख्मों को छिपा कर रखना यारो

जो भी देखेगा, कुरेद ... ... ...

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चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पे नहीं आए

तुम झुकते नहीं, और ... ... ...

Monday, August 3, 2009

बोल-अनमोल

* 40 *
“मैं एक सिद्धांत पर कार्य करता हूँ कि क्या सकारात्मक है और क्या सकारात्मक हो सकता है।”
* 39 *
“आँगन में ऎसे पौधे न लगाएं जिसमे काँटे हों, फूल हों तो ठीक है न हों तो भी ठीक है।”
* 38 *
“लालच व बेइमानी अदभुत शक्तियाँ हैं जो मनुष्य को अपना गुलाम बना लेती हैं।”
* 37 *
“सपने देखना जितना महत्वपूर्ण है उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण सपनों को साकार करने हेतु उठाए गये कदम हैं।”
* 36 *
“मेरी कार्य योजनाएँ कितनी सकारात्मक व उपयोगी हैं यह देखना भी मेरा दायित्व है।”
* 35 *
“भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्ति हर क्षण भ्रष्टाचार के नये-नये उपाय ढूँढते रहता है उसके पास परिवार व समाज हित के लिये वक्त ही नही होता।”
* 34 *
“सफलताएँ उनके कदमों को चूमतीं हैं जो सफलताओं की ओर कदम बढाते हैं”