Saturday, August 17, 2019

राजू उठ ... चल दौड़ लगाने चल

राजू उठ
भोर हुई
चल दौड़ लगाने चल

पानी गरम कर दिया है
दूध गरम हो रहा है
राजू उठ
भोर हुई
चल दौड़ लगाने चल

दूर नहीं अब मंजिल
पास खड़े हैं सपने
इक दौड़ लगा कर जीत ले
तू .. सारे अपने सपने

राजू उठ
भोर हुई
चल दौड़ लगाने चल ।

~ उदय

3 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

सुना है अब दौड़ने की जरूरते खत्म कर दी गयी हैं
सपने खुद पहुँचने लगे हैं घर चलकर अपने पैरों पर।

ahmed said...


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chaturposst said...

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