Saturday, January 11, 2014

आदत ...

सच ! चाटुकारों की बातों पे तू एतबार न कर 
देख, आईना खुद बयां कर रहा है सूरत तेरी ? 
… 
खोखले हो चुके दरख्तों की, कोई हमसे उम्र न पूछे 
उनके बाजु से चलो … तो तनिक संभल के चलो ? 
… 
वो जब भी मिले हैं, मुस्कुरा-मुस्कुरा कर ही मिले हैं 
फिर भी बहुत दिल दुखाया है उनकी खामोशियों ने ?
… 
सच ! उनकी तो आदत है, बात बात पे मुस्कुराने की 
गर तुम उनसे मिलो, तो तनिक संभल के मिलो ?? 
… 

1 comment:

मिश्रा राहुल said...

काफी उम्दा प्रस्तुति.....
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (14-01-2014) को "मकर संक्रांति...मंगलवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1492" पर भी रहेगी...!!!
- मिश्रा राहुल